शनिवार, 21 नवंबर 2009

बिलासपुर में नन्हें फूल बिखेर रहे कविता की ख़ुशबू




बच्चों को कविता लेखन के प्रोत्साहन हेतु एक कार्यशाला का आयोजन


50 बच्चे ले रहे भाग

बेटियों की प्रतिभागिता अधिक

इन दिनों हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में ज़िला भाषाधिकारी डॉ0 अनिता के आग्रह पर मैं एक वर्कशॉप में हिस्सा लेने आया हूँ। वर्कशॉप में आने का निमंत्रण इसी लिए स्वीकार किया क्योंकि मुझे जवाहर नवोदय विद्यालय में स्कूली बच्चों के साथ समय बिताना था और इन बच्चों को Hopes and challenges of youth विषय पर केंद्रित कविताएँ लिखने के लिए प्रेरित करना था। डॉ0 अनिता एक जागरूक महिला अधिकारी तो हैं ही साथ ही उनका आग्रह टालना मेरे लिए इसलिये भी मुश्किल था क्योंकि उनका मैं बहुत आदर करता हूँ। इसके साथ-साथ बिलासपुर आने की लालसा इसलिए भी रहती है कि मेरे परम मित्र और बड़े भाई अरुण डोगरा के साथ कुछ समय बिताने का अवसर मिल जाता है। सुमन भाभी (अरुण भाई की पत्नि) के हाथों का लज़ीज़ खाना और उनका स्नेह भला हमेशा कहाँ मिलता है। इसी लालच में जब मैंने बिलासपुर के कोठीपुरा में स्थित नवोदय विद्यालय के बच्चों ने जो मेरा स्वागत किया, उससे मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चों के बीच आकर मुझे अपना स्कूली जीवन याद आ गया और मैं उसे इन बच्चों के साथ जीने भी लगा। मैंने पाया कि जवाहर नवोदय विद्यालय के बच्चों में भविष्य के अनेक अच्छे कवि छुपे हैं। इन बच्चों को पहले से ही स्थानीय वरिष्ठ कवि विद्वान और कवि डॉ0 लेख राम और वरिष्ठ कवि एवम संगीत के अध्यापक रहे श्री अनूप सिंह मस्ताना ने बहुत कुछ निखार दिया था। बस इन बच्चों में कमी है तो बस इस बात की कि इन्होंने कविता का ज्ञान तो प्राप्त किया ही है लेकिन कविताएं पढ़ी नहीं है। तो अब मैं उन्हें कुछ अच्छे कवियों की कविताएँ पढ़वाऊँगा और उसके बात इन बच्चों की लेखनी के सुधार को देखूँगा। इस कार्यशाला में लिखी गई कविताओं में से ही चुन कर नवोदय विद्यालय एक कविता संग्रह को प्रकाशित करने जा रहा है जिससे इन नन्हें फूलों की ख़ुशबू की महक यानी इनकी कविताएँ अपनी अलग ही छाप छोड़ जाएगी। इसी विचार को आपसे साझा कर रहा हूँ कार्यशाला में एक हफ्ता रहूँगा और मेरा प्रयास रहेगा कि इन बच्चों की कविताओं को आपसे साझा करूँ और आपका प्रोत्साहन इन बच्चों को मिले ताकि इनकी लेखनी में सुधार आए और इनकी रचनाएँ किसी दिशा की तरफ इंगित करती नज़र आएँ। इन्हीं बच्चों में से एक छात्रा की कविता मुझे पहले दिन सबसे अच्छी लगी क्योंकि इस छात्रा की कविता में कहीं कहीं सृजनात्मकता औरों से अधिक है, यद्पि इन बच्चों की कविताओं को और तराशे जाने की अभी आवश्य्कता है। इस छात्रा की कविता देखें और अपने विचार मुझसे साझा भी करें। कार्यशाला की गतिविधियों से आपको अवगत करवाता रहूँगा और आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।
नवोदय विद्यालय की छात्रा वनीता जिसकी कविता शीघ्र पोस्ट करने वाला हूँ।

कार्यशाला की कुछ झलकियां:
कार्यशाला में बच्चों के बीच मैं भी बच्चा हो गया


कार्यशाला में नवोदय विद्यालय बिलासपुर (कोठीपुरा) की प्रधानाचार्य अनूपा ठाकुर्



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