(मुम्बई में हुए आतंकी हमले से
आहत हूं और ईश्वर से प्रार्थना
करता हूं कि आतंक फैलाने
वाले लोगों को खुदा राह दिखाए)
मत पूछो क्या है हाल शहर में।
ज़िन्दगी हुई है बवाल शहर में।
कुछ लोग तो हैं बिल्कुल लुटे हुए,
कुछ हैं माला-माल शहर में।
झुलसी लाशों की बू हर तरफ,
कौन रखे नाक पर रूमाल शहर में।
चोर,लुटेरे, डाकू और आतंकवादी,
सब नेताओं के दलाल शहर में।
भौंकते इंसानों को देखकर,
की कुत्तों ने हड़ताल शहर में।
मुहब्बत के मकां ढहने लगे,
मज़हब का आया भूंचाल शहर में।
बिना घूंस के मिले नौकरी,
ये उठता ही नहीं सवाल शहर में।
आहत हूं और ईश्वर से प्रार्थना
करता हूं कि आतंक फैलाने
वाले लोगों को खुदा राह दिखाए)
मत पूछो क्या है हाल शहर में।
ज़िन्दगी हुई है बवाल शहर में।
कुछ लोग तो हैं बिल्कुल लुटे हुए,
कुछ हैं माला-माल शहर में।
झुलसी लाशों की बू हर तरफ,
कौन रखे नाक पर रूमाल शहर में।
चोर,लुटेरे, डाकू और आतंकवादी,
सब नेताओं के दलाल शहर में।
भौंकते इंसानों को देखकर,
की कुत्तों ने हड़ताल शहर में।
मुहब्बत के मकां ढहने लगे,
मज़हब का आया भूंचाल शहर में।
बिना घूंस के मिले नौकरी,
ये उठता ही नहीं सवाल शहर में।
