आप सबके स्नेह का आभार! पिछले दिनों मेरे साथ क्या हुआ आप सब जानते हैं। लेकिन बहुत से दोस्तों और मित्रों ने मेरे न लिखने के निर्णय को न मानने का आग्रह किया उनमें सर्वप्रथम मैं भाई श्री अनूप शुक्ल जी का आभार व्यक्त करता हूँ जिनकी टिप्पणी को मैंने कई बार पढ़ा और कई बार नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन अंततः भाई अनूप शुक्ल की अनुभवी सलाह को मानना और अपने लेखन को जारी रखने की सलाह मुझे जायज़ भी लगी और साथ उन सभी दोस्तों के स्नेह का भी बार-बार ख़्याल आया जो मेरे न लिखने से दिल से आहत हैं। जिनमें बहुत से नाम उल्लेखनीय हैं इसलिये सभी के नाम न लेता हुआ मैं सभी का आभार जताता हूँ और आपसे वादा करता हूँ कि मैं भविष्य में भी पूरे उल्लास से लिखता रहूँगा और मैं उन सभी लोगों को नज़रअंदाज़ करता रहूँगा जो मुझे क्षति पहुँचाने के इरादे से की गई हों। मुझे पता है कि मेरी रचनाएँ आप सभी मित्रों को अच्छी लगती हैं इसलिए मुझे आपका आदर करते हुए लिखना है और लिखते रहना है। मैं अपने न लिखने के निर्णय को वापस लेते हुए सभी दोस्तों से आग्रह करता हूँ कि आपका स्नेह हमेशा मुझ पर इसी प्रकार बना रहे जिस प्रकार इस बार आपने मेरा साथ दिया है।
